Wednesday, July 9, 2014

Shri Hanuman ji Ki Aarti


आरती कीजै हनुमान लाला की | दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ||
जाके बल से गिरिबर काँपै | रोग - दोष जाके निकट न झांपै ||
अंजनी पुत्र महा बलदाई | संतन के प्रभु सदा सहाई ||
दे बीरा रघुनाथ पठाये | लंका जारि सीय सुधि लाये ||
लंका सो कोट समुद्र सी खाई | जात पवनसुत बार न लाइ ||
लंका जारि असुर संहारे | सियाराम जीके काज सँवारे ||
लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे | आनि सजीवन प्राण उबारे ||
पैठि पाताल तोरि जम - कारे | अहिरावन की भुजा उखारे ||
बायें भुजा असुर दल मारे | दाहिने भुजा संतजन तारे ||
सुर नर मुनि आरती उतारे | जय जय जय हनुमान उचारे ||
कंचन थार कपूर लौ छाई | आरती करत अंजना माई ||
जो हनुमान जी की आरती गावे | बसि बैकुंठ परमपद पावै ||


From: jaibababalaknathji.com

अंत में, मैं सबसे महत्वपूर्ण बात यह कहूँगा कि पशु पक्षियों को मत खाओ; और उन्हें मत तंग करो। अगर गाय भैस वगैरा को पालो तो उन्हें मान दो; और उनके गले में मत रस्सी बाधो। नहीं तो अपने पतन की रफ़्तार तेज कर लिए। यह मेरे समूह विवाद सिद्धांत के आधार पर है; जो कि मैंने अपने रूम मे जिक्र किया था। 

No comments:

Post a Comment